कान बहना यूं तो बहुत बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन जब भी ये समस्या होती है तो इसके साथ और भी छोटी-छोटी परेशानियों को लेकर आती है। कम सुनाई देना, कान में दर्द या फिर गले में खराश या खुजली जैसी समस्याएं कान बहने के कारण भी पैदा होती हैं। जानिए क्या है कान बहना -
कान के बाहर या भीतर पानी जैसे रंगहीन तरल पदार्थ या मवाद या खून के रिसाव को ही कान बहना कहते हैं। कान बहने की समस्या को मेडिकल भाषा में ओटोरिया कहा जाता है। वैसे तो ये समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन बच्चों, कुपोषित लोगों, मियादी बुखार के रोगियों या तैराकों में कान बहने की ये समस्या सबसे ज्यादा होती है।
आमतौर पर कान से मवाद आने को मरीज गंभीरता से नहीं लेता। कान बहने की समस्या को हल्के ढंग से लेना सेहत के लिए भारी यानी नुकसानदेह साबित हो सकता है। इस समस्या से कान के पर्दे में छेद हो जाता है और इससे रोगी बहरा भी हो सकता है। हम कान बहने की समस्या के प्रति सचेत तभी होते हैं, जब यह समस्या गंभीररूप धारण कर लेती है। कान बहने की समस्या के गंभीर परिणामों से बचने के लिए जरूरी है कि कानों की छोटी समस्याओं को भी नजरअंदाज न किया जाए।
कान बहकने का कारण
दरअसल हमारे कान एक नली द्वारा नाक के पिछले तथा गले के ऊपरी हिस्से से जुड़े होते हैं। इसलिए कई बार नाक तथा गले में होने वाली समस्याएं मध्य कान को प्रभावित करती हैं।
ऐसा होने पर कान में सूजन हो सकती है और इसकी ट्यूब बंद हो जाती है जिसके कारण कान के मध्य भाग में एक किस्म का तरल पदार्थ इकट्ठा होने लगता है। दबाव बढ़ने पर यह तरल पदार्थ कान के पर्दे को हानि पहुंचाता हुआ बाहर निकल आता है। इसके अलावा कुछ कारण आम तौर पर कान बहने के लिए जिम्मेदार होते हैं -
1 किसी भी प्रकार का वायरल, बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन होना कान बहने का कारण हो सकता है।
2 बाहरी कान में चोट लगने, फोड़ा-फुन्सी होने या फफूंद लगने पर भी अक्सर कान बहने की समस्या होती है।
3 वायु प्रदूषण, एलर्जी, गले में संक्रमण, चिकनपॉक्स, बुखार, कुपोषण या कई बार दांतों में इंफेक्शन के कारण भी कान बहने की समस्या हो सकती है।
कान बहने पर इन घरेलु उपायों को अपनाएं
कान बहने की समस्या से परेशान है तो इन घरेलू उपायों को करें, आपको बहुत जल्दी फायदा नजर आएगा।
नीम का तेल
कान के इंफैक्शन और बहने की समस्या से राहत पाने के लिए नीम का तेल काफी फायदेमंद है। नीम के तेल से कान के दर्द से भी राहत मिलती है। इस उपाय को करने के लिए नीम के तेल में 2-3 बूंदें कान में 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें। अब सिर को एक तरफ मोड़ें ताकि सारी पस बाहर निकल जाएं। इस उपाय को दिन में 2-3 बार करें।
स्टीम लें
कान में जमी पस को निकालने के लिए स्टीम लेना बहुत फायदेमंद है। इसके लिए बाऊल में गर्म पानी लेकर उसमें किसी भी एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदे डालें। फिर तौलिए से सिर को ढक कर 5 से 10 मिनट तक अपने सिर को एक तरफ झुकाकर भाप लें। इससे कान के बीच जमी हुई पस बड़ी आसानी से बाहर निकल जाएगी।
गर्म पानी से सिकाई करें
गर्म पानी से सिकाई करने से कान से पस भी आसानी से बाहर निकल जाएगी और दर्द से भी राहत मिलती है। इस उपाय को करने के लिए गर्म पानी से किसी कपड़े को गीला कर लें और इसका एक्स्ट्रा पानी निचोड़ लें। फिर इस कपड़े को 2 से 5 मिनट तक रखें और सिर को प्रभावित हुए की तरफ झुका लें। इससे पस आसानी से बाहर निकल जाएगा।
तुलसी का रस
इसके लिए तुलसी के पत्ते लेकर उसे पीस कर रस निकालें। फिर इसे हल्का गर्म करके इसकी 2-3 बूंदे कान में डालें। ऐसा दिन में 2 बार करें। आपको कुछ ही दिनों में फर्क दिखने लगेगा।
- अजवायन को गाय के शुद्ध घी में खूब पकाने के बाद छानकर रख लें। जब भी कान दर्द करे या बहे तो उस घी को गुनगुना करके एक-दो बूंद कान में डालने से आराम मिलता है।
- मधु, अदरक का रस व थोड़ा सा नमक मिलाकर गुनगुना कर लें और उसे कानों में डालें। कान का दर्द चला जाएगा। बहने में भी आराम होगा।
- यदि कान बह रहा है तो प्याज़ का रस थोड़ा-सा गर्म करके एक या दो बूंद कान में डालने से लाभ होता है। इससे बहरापन व दर्द भी चला जाता है।
- 10 तोला सरसों के तेल में 1 तोला रतनजोत मिलाकर पकाएं। जब रतनजोत जलने लगे तो इसे आग से उतारें और इस तेल को साफ शीशी में भरकर रख लें। कान के बहने व कान दर्द में इसे दो बूंद कानों में डालने से लाभ होता है।
- 20 माशा फिटकरी व 1 माशा हल्दी पीसकर कांच के किसी साफ बर्तन में रख लें। जब भी कान में दर्द हो या बहे तो कान को रूई से साफ करके दो रत्ती दवा डालने से आराम मिलता है।
गंभीर अवस्था में सर्जरी
शुरुआती दौर में कान बहने का इलाज एंटीबॉयोटिक और ओरल दवाओं से किया जा सकता है, जो अस्थायी समाधान है। स्थायी समाधान के लिए रोगी को सर्जिकल प्रक्रियाओं की जरूरत होती है।
इसे अत्यंत गंभीरता से लेकर नाक, कान व गला विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेना चाहिए अन्यथा यह कभी-कभी गंभीर रोग जैसे मेनिनजाइटिस या दिमागी बुखार आदि को उत्पन्न करने का कारण बन सकता है। कान में मवाद की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, किंतु प्राय: यह एक वर्ष से छोटे बच्चों या ऐसे बच्चों में ज्यादा होती है जो मां की गोद में ही रहते हैं यानी जो छोटे बच्चे बैठ नहीं सकते या करवट नहीं ले सकते।
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