मोटापा कम करने के घरेलु उपाय
आम तौर पर किसी पुरूष या महिला का हाईट और उम्र के हिसाब से वजन अधिक होना मोटापा कहलाता है किंतु चिकित्सा विज्ञान के अनुसार ओवेसिटी या मोटापा वह मेडिकल स्थिति होती है जिसमें बाॅड़ी फेट अधिक मात्रा में बढ़ जाता है जिसके बढ़ने से मानव शरीर में विपरीतगामी परिणाम और रोग उत्पन्न होने लगते है. इसे हम इस तरह से भी समझ सकते है, जब मनुष्य के शरीर में अत्यधिक मात्रा में वसा जमा हो जाती है या चर्बी बढ़ने लगती है जो की हमारे स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालने लगती है. शरीर के बॉडी मास को ठडप् (बी.एम.आई) के जरिए नापा जाता है आमतौर पर 18.5 से 25 के बीच बीएमआई को सामान्य माना जाता है परंतु यदि यह 30 के ऊपर चला जाए तो शरीर में मोटापे की समस्या उत्पन्न हो जाती है.
मोटापे के लक्षण
मोटापे के कारण शरीर के जीवन में कई सारे शारीरिक और मानसिक परिवर्तन आ जाते हैं और व्यक्ति मैं इसके लक्षण स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं किंतु कई बार लोग इसे महत्व नहीं देते हैं और अनदेखा कर देते हैं जो भी आगे चलकर उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होता है
मोटापे के प्रमुख लक्षण
सांस फूलना
पसीना ज्यादा आना
बहुत तेज आवाज में खर्राटे लेना
दिन प्रतिदिन अत्यधिक थकान महसूस करना
पीठ और जोड़ों में दर्द होना
मोटापे का दुष्प्रभाव
जितना जल्दी हो सके मोटापे की समस्या को कंट्रोल में कर लेना चाहिए क्योंकि
मोटापे के कारण शरीर का वजन तो बढ़ता ही है इसके अलावा बहुत सी बीमारियां
भी हो जाती है जिनमे की उच्च रकतचाप, हृदय की बीमारियां और सांस सम्बन्धी
अनेक रोग हो सकते है. मानव स्वास्थ्य पर अनेकों कुप्रभाव पड़ रहे है जो भारत ही नहीं विश्वभर के मानव समाज के लिये खतरा बन चुके है।
डायबिटीज या मधुमेह
लगभग 25ः डायबिटीज टाईप-2 के केस मोटापे या अधिभार के कारण होते है। टाईप-2 डायबिटीज रोग होने की ऐसे मरीजों में अधिक संभावनाएँ होती है। मधुमेह रोग के कारण लोगों में शारीरिक क्षमताएँ कम होने लगती है जिससे वे ब्लड़ शुगर को नियंत्रित नहीं कर पाते है जिसका परिणाम शीघ्र (असमय) मृत्यु के रूप में होता है। हृदय रोग, किडनी रोग, स्ट्रोक, अंधत्व, स्टेस्टीसिटी आदि मधुमेह के शीघ्रगामी परिणाम होते है और लोगों में वसा बढ़ने की गति ऐसी दशा मंे दोगुनी हो जाती है।
कैंसर
कुछ प्रकार के कैंसर आॅबेसिटी एपीडामिक के कारण भी होते है। विशेषकर महिलाओं मंे मोटापा व अधिक भार कई क्राॅनिक रोगों का कारण बन जाता है जैसे हृदय रोग, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, आस्टियोआंर्थराईटिस कुछ विशेष प्रकार के कैंसर जैसे कोलन, ब्रेस्ट आदि हो जाते है।
स्वीप एपनोआ
इस रोग के अधिभार के कारण गंभीर लक्षण मोटे लोगों में देखने को मिलते है। इस रोग में मोटे व्यक्ति की श्वसन क्रिया कुछ समय के लिये रूक जाती है ऐसा सोते समय होता है। विशेष रूप से दिन के समय सोने पर यह अधिक होता है और इसके कारण हार्ट फेल तक हो जाता है। यह समस्या शारीरिक अतिभार के कारण उत्पन्न होती है।
आस्टियो आर्थराईटिस
मोटापा और अतिभार मिलकर कद संबंधी रिस्क को जन्म देते है। अतिभार जोड़ों पर अधिक दबाव डालता है जिससे हड्डियाँ कमजोर होकर मुड़ने लगती है। निचली पीठ, हिप्स (कुल्हों), घुटनों पर इसका प्रभाव अधिक होता है और ये आर्थराईटिस के गिरफ्त में आ जाते है।
गाऊट
गाऊट एक प्रकार का जोड़ों का रोग है जो उच्चस्तरीय युरिक एसिड के कारण होता है जो रक्त में होता है। कभी-कभी यह एसिड ठोस पत्थर या छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में उत्पन्न कर देता है जो जोड़ों में जम जाते है। यह रोग अतिभार वाले रोगों मंे आमतौर पर पाया जाता है और इसके समानांतर अन्य रोग होने की संभावनाएँ अधिभार वाले व्यक्तियों में बढ़ जाती है।
गाल ब्लड़र रोग और गाल स्टोन
यह रोग भी आम तौर पर भारी लोगों में पाया जाता है और जैसे-जैसे वजन बढ़ता जाता है रोग की संभावनाएँ भी बढ़ती जाती है फिर और कोलेस्ट्राॅल का साथ इस रोग के लिये कारण बन जाता है।
हायपरटेंशन
जिसे उच्च रक्तचाप भी कहा जाता है। जब ब्लड़प्रेशर 140ध्90 या इससे अधिक होता है तो उसे हायपरटेंशन कहा जाता है। 65 से 80ः लोगों में हायपरटेंशन का कारण मोटापा पाया गया है। यह आर्टरीज पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने से होता है। इसके कारण अन्य हृदय संबंधी रोगों के होने की संभावनाएँ भी बढ़ जाती है।
स्ट्रोक
स्ट्रोक दिमाग में ब्लड़ क्लाटिंग के कारण होता है। यह गलत खून दिमाग को कोलेस्ट्राॅल के कारण पहुंचता है। जब कोलेस्ट्राॅल का स्तर उच्च होता है तो यह हार्ट मंे जमने लगता है जो यहाँ से दिमाग की ओर बढ़ता है और स्ट्रोक का कारण बनता है। इसके कारण लकवा (पेरेलेसिस), साँस लेने में कठिनाई, मूर्छित अवस्था या अर्ध बेहोशी, कमजोरी आदि समस्याएँ जन्म ले लेती है।
इस प्रकार मोटापा व अतिभार मानव शरीर को अनेकों परेशानियों में डाल देती है जिससे बचाव करना मानव जीवन के लिये अति आवश्यक है।
वजन कम करने के घरेलू नुस्खे
सबसे पहले अपने भोजन में परिवर्तन कीजिए और संतुलित मात्रा में घर का बना भोजन खाना प्रारंभ करें बाहर का खाना बिलकुल बंद कर दें.
फास्ट फूड और पैकेट फूड को बिलकुल ही कम मात्रा में लें।
ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के अलावा हमेशा कुछ न कुछ खाने की आदत है, तो अपनी इस गंदी आदत को बदल दें, क्योंकि हमेशा कुछ न कुछ खाते रहने वालों का वजन कभी कम नहीं हो सकता है.
खाना ठूस-ठूस कर न खाएं. जितनी भूख हो उससे थोड़़़ा कम ही खाना खाना चाहिए. इससे खाने के बाद आलस्य भी नहीं आएगा और मोटापे की दृष्टि से भी यह अच्छा है.
