क्या आप सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के बारे में जानते हैं? आपके लिए जानना बेहद जरूरी है क्योंकि नौकरीपेशा लोगों में तेजी से बढ़ रही है यह समस्या। सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस रीढ़ की हड्डियों से संबंधित समस्या है, जो लंबे समय तक गर्दन झुकाकर या देर तक कम्प्यूटर पर काम करते हैं। खास तौर से उन नौकरीपेशा लोगों में यह समस्या ज्यादा है जिनकी बैठक लंबी होती है और जो कम्प्यूटर या अन्य साधनों पर सावधान की मुद्रा में बैठकर देर तक काम करते हैं। जब आप लंबे समय तक सीधी अवस्था में गर्दन झुकाकर बैठते हैं तो खुद भी मेरुदण्ड एवं गर्दन व कंधों में दर्द महसूस करते हैं। यह स्पांडिलाइटिक चेंज के कारण होता है।
आमतौर पर इसके शिकार 40 की उम्र पार कर चुके पुरुष और महिलाएं होती हैं। आज की जीवनशैली में बदलाव के कारण युवावस्था में ही लोग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। वे युवा ज्यादा परेशान मिलते हैं, जो आईटी इंडस्ट्री या बीपीओ में काम करते हैं या जो लोग कम्प्यूटर के सामने अधिक समय बिताते हैं। अनुमानतः हमारे देश का हर सातवाँ व्यक्ति गर्दन और पीठ दर्द या जोड़ों के दर्द से परेशान हैं।
यह बीमारी जोड़ों को विशेष रूप से प्रभावित करती है। रीढ़ की हड्डी के अलावा कंधों और कूल्हों के जोड़ इससे प्रभावित होते हैं। एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस होने पर स्पाइन, घुटने, एड़ियां, कूल्हे, कंधे, गर्दन और जबड़े कड़े हो जाते हैं।
दरअसल एक ही मुद्रा में लंबे समय तक सर्वाइकल वर्टिब्रा के प्रयोग तथा व्यायाम न करने से दो कशेरुकाओं के बीच की खाली जगह कम होने लगती है जिसे स्पांडिलाइटिक चेंज कहा जाता है। इसके कारण उस वर्टिब्रा से जुड़ी मांसपेशियों का मार्ग अवरुद्ध होने लगता है और गर्दन व उसके आसपास दर्द होने लगता है, जो आगे चलकर सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस में बदल जाता है।
शरीर के विभिन्न भागों को प्रभावित करने के आधार पर स्पोंडिलोसिस तीन प्रकार का होता है
1. सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस
गर्दन में दर्द, जो सर्वाइकल को प्रभावित करता है वह सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस कहलाता है। यह दर्द गर्दन के निचले हिस्से, दोनों कंधों, कॉलर बोन और कंधों के जोड़ तक पहुंच जाता है। इससे गर्दन घुमाने में परेशानी होती है और कमजोर मांसपेशियों के कारण बांहों को हिलाना भी कठिन होता है।
2. लम्बर स्पोंडिलोसिस
इसमें स्पाइन के कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है।
3. एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस
अगर इस समस्या का समय रहते सही इलाज नहीं किया गया, तो स्नायुओं पर दबाव और बढ़ जाता है। ऐसा होने पर कारण कई बार हाथ और उंगलियों में दर्द होने लगता है।
इससे बचने के लिए जरूरी है कुछ सावधानियां रखना -
1 लंबे समय तक एक ही अवस्था में बैठकर एवं झुककर काम न करें। समय-समय पर ब्रेक जरूर लेते रहें ताकि मांसपेशियों को राहत मिल सके।
2 यदि आप आगे की ओर झुककर काम करते हैं, तो शाम को कम से कम 5 मिनट पीछे की ओर झुककर व्यायाम करें।
3 यदि आपकी गर्दन में दर्द होता है तो अस्थि रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर गर्दन का एक्स-रे कराएं।
4 यदि आप सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस से ग्रसित हो ही गए हैं तो कुछ परहेज करते हुए व्यायाम करें, तो जरूर लाभ मिलेगा।
5 दर्द अधिक रहने पर अल्पकालीन अल्ट्रासोनिक थैरेपी की आवश्यकता पड़ती है, जिसे घर पर आसानी से दिया जा सकता है। चिकित्सक की सलाह के अनुसार आप इसे कर सकते हैं।
पहले दाहिने गाल पर दाईं हथेली लगाएं और दाहिनी ओर गर्दन घुमाने की कोशिश करें। ऐसे में दाएं हाथ पर दबाव रहेगा और आप उस दबाव के विपरीत दिशा में देखेंगे। ठीक उसी प्रकार बाहिने गाल पर बायां हाथ लगाएं तथा उपरोक्त अनुसार ही क्रिया करें।
अब दोनों हथेलियों को माथे पर टिकाकर माथे पर दबाव डालें। इस दबाव के विपरीत माथे से दबाव डालें। अब दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर सिर के पीछे के हिस्से पर लगाकर सिर पर आगे की ओर दबाव डालें तथा उस दबाव के विपरीत सिर को पीछे की ओर दबाएं।
स्पोंडिलोसिस क्या है?
स्पोंडिलोसिस को हम स्पॉन्डिलाइटिस के नाम से भी जानते है।स्पोंडिलोसिस दो यूनानी शब्द ‘स्पॉन्डिल’ तथा ‘आइटिस’ से मिलकर बना है। स्पॉन्डिल का अर्थ है वर्टिब्रा तथा ‘आइटिस’ का अर्थ सूजन होता है इसका मतलब वर्टिब्रा यानी रीढ़ की हड्डी में सूजन की शिकायत को ही स्पॉन्डिलाइटिस कहा जाता है। इसमें पीड़ित को गर्दन को दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे करने में काफी दर्द होता है। स्पोंडिलोसिस की समस्या आम तौर पे स्पाइन यानी रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है। पोंडिलोसिस रीढ़ की हड्डियों की असामान्य बढ़ोत्तरी और वर्टेबट के बीच के कुशन में कैल्शियम की कमी और अपने स्थान से सरकने की वजह से होता है।आमतौर पर इसके शिकार 40 की उम्र पार कर चुके पुरुष और महिलाएं होती हैं। आज की जीवनशैली में बदलाव के कारण युवावस्था में ही लोग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। वे युवा ज्यादा परेशान मिलते हैं, जो आईटी इंडस्ट्री या बीपीओ में काम करते हैं या जो लोग कम्प्यूटर के सामने अधिक समय बिताते हैं। अनुमानतः हमारे देश का हर सातवाँ व्यक्ति गर्दन और पीठ दर्द या जोड़ों के दर्द से परेशान हैं।
यह बीमारी जोड़ों को विशेष रूप से प्रभावित करती है। रीढ़ की हड्डी के अलावा कंधों और कूल्हों के जोड़ इससे प्रभावित होते हैं। एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस होने पर स्पाइन, घुटने, एड़ियां, कूल्हे, कंधे, गर्दन और जबड़े कड़े हो जाते हैं।
दरअसल एक ही मुद्रा में लंबे समय तक सर्वाइकल वर्टिब्रा के प्रयोग तथा व्यायाम न करने से दो कशेरुकाओं के बीच की खाली जगह कम होने लगती है जिसे स्पांडिलाइटिक चेंज कहा जाता है। इसके कारण उस वर्टिब्रा से जुड़ी मांसपेशियों का मार्ग अवरुद्ध होने लगता है और गर्दन व उसके आसपास दर्द होने लगता है, जो आगे चलकर सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस में बदल जाता है।
स्पोंडिलोसिस के प्रकार
शरीर के विभिन्न भागों को प्रभावित करने के आधार पर स्पोंडिलोसिस तीन प्रकार का होता है
1. सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस
गर्दन में दर्द, जो सर्वाइकल को प्रभावित करता है वह सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस कहलाता है। यह दर्द गर्दन के निचले हिस्से, दोनों कंधों, कॉलर बोन और कंधों के जोड़ तक पहुंच जाता है। इससे गर्दन घुमाने में परेशानी होती है और कमजोर मांसपेशियों के कारण बांहों को हिलाना भी कठिन होता है।
2. लम्बर स्पोंडिलोसिस
इसमें स्पाइन के कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है।
3. एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस
अगर इस समस्या का समय रहते सही इलाज नहीं किया गया, तो स्नायुओं पर दबाव और बढ़ जाता है। ऐसा होने पर कारण कई बार हाथ और उंगलियों में दर्द होने लगता है।
स्पोंडिलोसिस का घरेलु उपचार
इससे बचने के लिए जरूरी है कुछ सावधानियां रखना -
1 लंबे समय तक एक ही अवस्था में बैठकर एवं झुककर काम न करें। समय-समय पर ब्रेक जरूर लेते रहें ताकि मांसपेशियों को राहत मिल सके।
2 यदि आप आगे की ओर झुककर काम करते हैं, तो शाम को कम से कम 5 मिनट पीछे की ओर झुककर व्यायाम करें।
3 यदि आपकी गर्दन में दर्द होता है तो अस्थि रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर गर्दन का एक्स-रे कराएं।
4 यदि आप सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस से ग्रसित हो ही गए हैं तो कुछ परहेज करते हुए व्यायाम करें, तो जरूर लाभ मिलेगा।
5 दर्द अधिक रहने पर अल्पकालीन अल्ट्रासोनिक थैरेपी की आवश्यकता पड़ती है, जिसे घर पर आसानी से दिया जा सकता है। चिकित्सक की सलाह के अनुसार आप इसे कर सकते हैं।
ये व्यायाम करेंगे मदद -
पहले दाहिने गाल पर दाईं हथेली लगाएं और दाहिनी ओर गर्दन घुमाने की कोशिश करें। ऐसे में दाएं हाथ पर दबाव रहेगा और आप उस दबाव के विपरीत दिशा में देखेंगे। ठीक उसी प्रकार बाहिने गाल पर बायां हाथ लगाएं तथा उपरोक्त अनुसार ही क्रिया करें।
अब दोनों हथेलियों को माथे पर टिकाकर माथे पर दबाव डालें। इस दबाव के विपरीत माथे से दबाव डालें। अब दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर सिर के पीछे के हिस्से पर लगाकर सिर पर आगे की ओर दबाव डालें तथा उस दबाव के विपरीत सिर को पीछे की ओर दबाएं।
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