बच्चों में मोटापा बढ़ने की मुख्य कारण व बचाब के उपाय
हमारे देश में कुपोषण अथवा अल्प पोषण की समस्या गम्भीर है, वहीं दूसरी ओर अति पोषण की वजह से बच्चों में मोटापा की स्थिति भी गंभीर होती जा रही है। हाल ही में किये गये एक अनुसंधान से पता चला है कि अमेरिका, चीन, जापान, फ्रांस, आदि समृद्ध देशों की तरह अति पोषण सम्बन्धी विसंगती भारत जैसे विकासशील देश में भी बढ़ी है।
छोटी उम्र में गोल-मटोल बच्चे अच्छे तो लगते हैं पर आगे चलकर उन्हें डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, जोड़ों में दर्द, गर्भाशय की समस्या आदि की आशंका बढ़ जाती है।
अधिक खानपान के अलावा बच्चों में मोटापे के कई कारण हैं। आनुवंशिक, किसी दूसरी बीमारी टी.बी., ब्रेन ट्यूमर, एंडोक्राइन ग्लैंड की बीमारी, तनाव, एकाकीपन, अधिक देर तक टी.वी. देखना, खेलकूद न करना आदि कारणों से मोटापा बढ़ सकता है।
अनियंत्रित खानपान
अधिकतर मामलों में देखा गया है, अनियंत्रित खानपान यानी पोषण तथा उसके अनुपात में बच्चे द्वारा परिश्रम (खेलकूद, व्यायाम या कामकाज) न करना बच्चों में मोटापा बढ़ाता है। बच्चों में मिठाई, चाकलेट, टाॅफी, कोल्ड ड्रिंक, फास्ट फूड, आइस्क्रीम, चाउमीन, बर्गर, हाॅट डाॅग, चिप्स आदि खाने की आदत बढती जा रही है जिसकी वजह से भी उनमें मोटापा बढ़ रहा है।
बेबी फूड
आज के माता-पिता बच्चे की हिष्ट-पुष्ट बनाने के लिए शिशु अवस्था से बेबी फूड देने लगते है। जान लें बचचे को बेबी फूड देने से बच्चा हिष्ट-पुष्ट होने की बजाय गोलमटोल हो जाता है। इससे उनका मानसिक विकास भी नहीं होता है। बेबी फूड के रुप में दिया जाने वाला अतिरिक्त कैलोरी व फैट उन्हें मोटा व थुलथुला कर देता है जो बच्चे के शारीरिक विकास और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
हीनभावना का शिकार
बच्चों में मोटापा बढ़ने से बडे़ होने पर बच्चे भद्दे लगते हैं। स्कूल जाने पर उनके साथी उन्हें भीम, भोंदू, हाथी, अप्पू आदि कह कर चिढ़ाते हैं। जिसकी वजह से वे हीन भावना का शिकार हो जाते हैं।
शारीरिक विकास का रुक जाना
बचपन में जिस फुर्ती से बच्चे काम करते हैं। उस फुर्ती से मोटे बच्चे काम नहीं कर पाते। थोड़ी-सी भागदौड़ करने पर उनकी सांस फूलने लगती है। दिल की धड़कन बढ़ जाती है। मोटे बच्चे खेलकूद में हिस्सा नहीं ले पाते जिसकी वजह से उनका शारीरिक विकास भी रुक जाता है।
शीघ्र नियंत्रण जरूरी
यदि बच्चे में मोटापा बढ़ रहा है तो शीघ्र नियंत्रण करना जरुरी है। सबसे पहले यह पता लगाना जरुरी है कि मोटापे का कारण क्या है? यदि किसी बीमारी की वजह से बच्चे में मोटापा बढ़ रहा है तो विशेषज्ञ से मिलकर इसका इलाज करवा कर मोटापे पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
बच्चे में वंशानुगत मोटापा है तो शैशवास्था से ही देखभाल करना जरुरी है। पारिवारिक परिवेश भी बच्चे में मोटापा बढ़ाने का जिम्मेदार है। जिन परिवारों में अनियंत्रित खान-पान, अधिक कैलोरी वाला खाना, अधिक मीठा का इस्तेमाल किया जाता है, उनके बच्चे मोटापा से बच नहीं सकते।
फास्ट फूड नुकसानदायक
आजकल बच्चों में फास्ट फूड कोक, चिप्स, पापकार्न, बिस्कुट, न्यूडल्स, आईस्क्रीम जैसे फूड काफी लोकप्रिय है। बच्चा घर, स्कूल या बाहर निकलने पर इन सब चीजों को खाता रहता है जो सेहत के लिए नुकसानदायक साबित होता है। फास्ट फ्रूड में पाये जानी वाली अधिक कैलोरी की वजह से बच्चों में मोटापा बढ़ता है।
मैदानी खेल
मैदानी खेल, व्यायाम से बच्चों का नाता जैसे टूट गया है। बच्चे खेलने की बजाय अपना अधिकतार समय टीवी देखने, इंटरनेट, वीडियो गेम्स, कम्प्यूटर गेम्स में बिताते हैं नतीजतन उनके शरीर का भार बढ़ने लगता है। बच्चे को टी.वी., विडियो गेम जैसे बैठ कर खेलने वाले खेलों की बचायें, मैदानी खेल जैसे फुटबाल, बेडमिनटन, हाॅकी, दौंड, चोर-पुलिस आदि खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करें तथा बच्चे को सायकिलिंग, जोगिंग, स्वीमिंग आदि भी करवायें।
शरीर में उर्जा असंतुलन
बच्चे का मोटापा कम करने के लिए माता-पिता को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। शरीर में उर्जा असंतुलन की वजह से मोटापा होता है (यानी अधिक खाना तथा कम काम करना)। इस उर्जा की आवश्यकताओं में बदलाव लाना जरुरी होता है। इसके लिए आप जितना आहार बच्चे को दें, उस हिसाब से उससे परिश्रम भी करवायें।
अनुभवी डायटिशन का मार्ग निर्देशन लें
बच्चें का आहार कन्ट्रोल करना भी जरुरी है। आहार कंट्रोल करने के लिए कम कैलोरी वाला खाना देने की आवश्यकता होती है। इसके लिए काफी कम कैलोरी वाला खाना देकर वजन कम करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। शरीर का वजन एक बार में नहीं, बल्कि धीरे-धीरे कम करना चाहिए। इसके लिए अनुभवी डायटिशन के मार्ग निर्देशन में बच्चे की आहार व्यवस्था निश्चित करें।
चाइल्ड स्पेशलिस्ट
अधिक कैलोरी वाली चीजें चाकलेट, चिप्स, मिठाई आदि पर पूरी तरह से रोक लगानी चाहिए। हालांकि कंट्रोल करने पर बच्चे में कमजोरी, चक्कर, भूख न लगना, सिरदर्द, मन न लगना आदि शिकायत दिखायी दे सकती है। इससे घबराना नहीं चाहिए। इसके लिए चाइल्ड स्पेशलिस्ट को दिखाना चाहिए।
