डायबिटीज : उत्पन्न होने के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार
डायबिटीज यानी मधुमेह की समस्या का पता तुरंत नहीं चलता है। लंबे समय तक मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को इस बात का आभास ही नहीं होता है कि वह इस खतरनाक बीमारी से पीड़ित है। यदि अपनी दिनचर्या, खानपान आदि पर ध्यान दिया जाएं तो इससे बचा जा सकता हैं।
क्या है डायबिटीज
जब रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो उसे मधुमेह यानी डायबिटिज कहते हंै। खाली पेट होने पर रक्त में सामान्य तौर पर शर्करा का स्तर 110 किग्रा. से क और 75 ग्राम ग्लूकोज पीने के दो घंटे बाद 140 मिग्रा. से कम हो तो यह सामान्य होता है।
मधुमेह की स्थिति में खाली पेट रक्त शर्करा का स्तर 126 और 75 ग्राम ग्लूकोज पीने से 2 घंटे बाद 200 मिग्रा. से अधिक होता है।
डायबिटीज के प्रकार
डायबिटीज की बीमारी दो प्रकार की होती है
इन्सुलिन डिपेन्डेंट
इसमें इन्सुलिन पैदा करने वाली कोश्किायें नष्ट हो जाती है। इस के लिए बाहर से इन्सुलिन लेने की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रकार की डायबिटीज ठीक नहीं होती। आजीवन बाहरी इन्सुलिन पर रहना पड़ता है।
इन्सुलिन नाॅन डिपेन्डेंट
इसमें शरीर में इन्सुलिन पैदा तो होती है पर किसी कारणवश रूकावट पैदा हो जाती है जिसकी वज़ह से यह शरीर में सप्लाई नहीं हो पाती है। इसलिए खून में शक्कर की मात्रा बढ़ जाती है। इन्सुलिन नाॅन डिपेन्डेंट दो प्रकार की होती है।
मोटापा लाने वाली
इस प्रकार के डाबिटीज से पीड़ित होने पर शरीर मोटा हो जाता है। सही इलाज से यह ठीक हो जाता है।
मोटापा न लाने वाली
इस प्रकार के डायबिटीज से मोटापा बढ़ता है। यह समस्या गर्भवस्था, किसी खास दवा के सेवन करने पर अस्थायी तौर पर डायबिटीज हो सकती है।
उत्पन्न होने के कारण
डायबिटीज रोग में शरीर में पाई जाने वाली ग्रंथि पेन्क्रियाज से इंसुलिन हार्मोन का स्त्राव कम हो जाता है। इससे ग्लूकोज समुचित रूप से जलकर ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता है। इसी कारण रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। जब रक्त में ग्लूकोज एक सीमा से अधिक बढ़ जाता है, तो शरीर उससे छुटकारा पाने के लिए गुर्दे के माध्यम से इसे मूत्र के साथ निकालना शुरू कर देता है।
किसको है डायबिटीज होने का खतरा
- डायबिटीज का पारिवारिक इतिहास।
- बहुत ज्यादा मोटा।
- 40 साल से ज्यादा।
- 4 किलोग्राम से ज्यादा वजन के बच्चों को जन्म देने वाली महिला।
ग्लूकोज का स्तर बढ़ने पर नुकसान
रक्त में बढ़ा हुआ ग्लूकोज रक्त वाहनियों की भीतरी दीवार की कोशिकाओं को धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त कर देता हैं। इस प्रक्रिया में रोगी को किसी प्रकार का दर्द अथवा कष्ट नहीं होता है और मरीज़ इससे पूरी तरह बेखबर रहता है। एक सीमा से अधिक क्षति होने पर नाजुक अंगों जैसे आंख के पर्दे, हृदय, मस्तिष्क के कार्य आदि प्रभावित होने लगते हंै। इसके बाद ही मरीज को पता चलता है, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
डायबिटीज के मुख्य लक्षण
- थकान, कमजोरी, चक्कर, बेहोशी, पैरों में दर्द क्योंकि ग्लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता है।
- भूख का बढ़ जाना, बहुत ज्यादा प्यास लगना।
- बार-बार पेशाब लगना।
- पैर में टीस होना, पैरों में किसी प्रकार का घाव होना वह ठीक न होना और गैंग्रीन का रूप ले लेना।
- अधिक पेशाब और तेज भूख लगना।
- आंखों और अन्य अंगों में खून का सही बहाव न हो पाने से तकलीफ होना।
- तेजी से वजन गिरना, कमजोरी आना।
- बार-बार चश्मे का नंबर बदलना।
- जननांगों मंे खुजली और संक्रमण होना, सेक्स में अरूचि हो जाना
- हृदयघात, मस्तिष्क आघात होना।
- शरीर पर फोड़ा, फुन्सी और खुजली होना।
- पतले दस्त, कभी-कभी कब्ज और मोतियाबिन्द की शिकायत।
जरूरी है इंसुलिन
डायबिटीज के मरीज को शुगर (शर्करा) को नियंत्रित के लिए इंसुलिन की आवश्यकता होती है। इसे इंजेक्शन द्वारा त्वचा के नीचे प्रवेश करवाया जाता है। आजकल इंसुलिन इंजेक्शन की बजाय इंसुलिन पंप भी आ गए है। जिसके द्वारा बार-बार इंसुलिन लेने की समस्या से बचा जा सकता है।
इंसुलिन पंप
इंसुलिन पंप एक पेजर के आकार का उपकरा होता है। इसमें एक इंसुलिन वायल फिट होता है। यह उपकरण एक पतली नीडिल और इंफ्यूजन सेट के माध्यम से शरीर के साथ जुड़ा होता है। यह पंप शरीर के लिए आवश्यक इंसुलिन रक्त में मिलाता रहता है। इसके लिए अलग से इंसुलिन के इंजेक्शन लगाने की आवश्यकता नहीं होती है। इसकी खास बात यह है कि यह शरीर में बनने वाले इंसुलिन की तरह प्राकृतिक इंसुलिन की सप्लाई करता है।
डायबटीज का इलाज
भोजन में क्या खाएं और क्या ना खाएं
क्या खाएं-
- मधुमेह रोगी का भोजन ऐसा होना चाहिए जो रक्त में ग्लूकोज को बढ़ाने से रोकें।
- भोजन पौष्टिक होना चाहिए जिसमें कार्बोहाइड्रेट और फाइबर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो।
- भोजन की मात्रा भी शारीरिक श्रम के अनुसार नियंत्रित होना चाहिए।
- अंकुरित दालें, चने, गेंहूं, हीर सबजी आदि का सेवन करें।
- खाने में रेशेदार चीजों का अधिक इस्तेमाल करें।
- आटे को बिना छाने इस्तेमाल करें।
क्या न खाएं-
- डायबिटीज के रोगी को बहुत अधिक मीठा, नमक, डिब्बाबंद व फास्ट फूड खाने से बचना चाहिए।
- जूस, जेम, जेली, शहद, गुड़, चाकलेट आदि भी खाने से बचना चाहिए।
- तले हुए भोजन जैसे पूड़ी, परांठे, समोसा, दालमोठ, सेव आदि के सेवन से बचें।
- चाय, काॅफी, दही, पनीर व अन्य दूध से बने पदार्थ का सेवन न करें।
- शुध्द घी, मक्खन, मलाई आदि में अपने आहार में शामिल न करें।
- सफेद मीट जैसे मछली, चिकन, मीट आदि लेने से बचें।
डायबिटीज में व्यायाम
- प्रतिदिन कम से कम चार किलोमीटर पैदल चलें और हल्का व्यायाम जरूर करें। इससे शरीर का वजन कम होता है। पैरों में रक्त संचार बढ़ता है। हृदय पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है और रक्त में शर्करा को नियंत्रित करने में मदद मिलती हैं।
- पैदल चलें, नियमित रूप से टहलें या किसी प्रकार का शारीरिक श्रम करें।
- प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें।
डायबिटीज की दवा
मधुमेह के इलाज में दवाओं का नंबर भोजन और व्यायाम के बाद आता है। चूंकि यह रोग इंसुलिन की कमी के कारण होता है। इसलिए यदि किसी प्रकार इंसुलिन की मात्रा बढ़ाई जा सकें तो ही इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए रोगी को सीधे इंसुलिन ही दिया जाता है।
डायबिटीज के रोगियों की नियमित जांच
रक्त में बढ़ा हुआ ग्लूकोज पूरे शरीर को प्रभावित करता है। इसलिए प्रारंभिक अवस्था में पूरे शरीर की जांच करवा लेना आवश्यक होता है।
जागरूकता
मधुमेह एक सायलेंट किलर के रूप में काम करता है। इसलिए इसके बारे में लोगों की जागरूकता जरूरी है। जिनके परिवार में मधुमेह का इतिहास रहा है, वे लोग खास तौर पर समय-समय पर ग्लूकोज की जांच अवश्य कराते रहना चाहिए।
