स्पोंडिलोसिस : स्पोंडिलोसिस के कारण, लक्षण और राहत पाने के घरेलु नुस्खें - Health Care Tips Hindi

स्पोंडिलोसिस : स्पोंडिलोसिस के कारण, लक्षण और राहत पाने के घरेलु नुस्खें

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स्पोंडिलोसिस को हम स्पॉन्डिलाइटिस के नाम से भी जानते है.  स्पोंडिलोसिस यानि रीढ़ की हड्डी में सूजन की शिकायत को ही स्पॉन्डिलाइटिस कहा जाता है। इसमें पीड़ित को गर्दन को दाएं- बाएं और ऊपर-नीचे करने में काफी दर्द होता है। स्पोंडिलोसिस की समस्या आम तौर पे स्पाइन यानी रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है. आमतौर पर स्पोंडिलोसिस के शिकार 40 की उम्र पार कर चुके पुरुष और महिलाएं होती हैं. आज की जीवनशैली में बदलाव के कारण युवावस्था में ही स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याओं के शिकार हो रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का सबसे प्रमुख कारण गलत पॉश्चर है, जिससे मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है. इसके अलावा शरीर में कैल्शियम की कमी दूसरा महत्वपूर्ण कारण है. एक दशक पहले के आंकड़ों से तुलना करें तो इस बीमारी के मरीजों की संख्या तीन गुनी बढ़ी है. उनमें युवाओं की संख्या सबसे अधिक है.


 स्पोंडिलोसिस के लक्षण

  • गर्दन में दर्द
लम्बे समय तक खड़े रहने या बैठे रहने पर,रात में सोते समय,छींकते,खांसते या हंसते समय,या फिर गर्दन को इधर उधर घुमाते समय गर्दन में दर्द होना इसका मुख्य लक्षण है। कई लोगों में यह दर्द लगातार बना रहता है जबकि कुछ लोगों में अचानक से तेज दर्द उठता है।
  • गले में जकड़न
रात को सोकर सुबह उठने पर अक्सर हमारे गले में जकड़न हो जाती है कभी दृ कभी तो यह बहुत ही कष्टदायी होता है। आपको गर्दन घुमाने पर कुछ घिसने की आवाजें भी आ सकती हैं,और आपको गर्दन घुमाने या झुकाने में बहुत दिक्कत का सामना भी करना पड सकता है ।




  • सरदर्द

 इस अवस्था में यह दर्द अक्सर गर्दन के पिछले हिस्से से शुरू होकर धीरे सिर के अगले हिस्से तक बढ़ता है।

स्पोंडिलोसिस होने की मुख्य कारण


भोजन में पोषक तत्वों, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी के कारण हड्डियों का कमजोर हो जाना हीस्पोंडिलोसिस होने का सबसे बड़ा कारण है।
  • बैठने या खड़े रहने का गलत तरीका आपको स्पोंडिलोसिस की समस्या का सामना करवा सकता है।
  •  बढ़ती उम्र भी एक एहम कारण है स्पोंडिलोसिस होने का।
  • मसालेदार, ठंडी या बासी चीजों को खाने से भी स्पोंडिलोसिस हो सकता है।
  • आलस्य से भरी जीवनशैली आपको आगे चलके स्पोंडिलोसिस की परेशानी दे सकती है.
  • लंबे समय तक ड्राइविंग करना भी खतरनाक साबित हो सकता है।
  • महिलाओं में अनियमित पीरियड्स आना भी एक बड़ी वजह बन सकता है स्पोंडिलोसिस होने का।
  • उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का क्षय होना भी एक कारण है ,अक्सर फ्रैक्चर के बाद भी हड्डियों में क्षय की स्थिति होने लगती है

स्पोंडिलोसिस से राहत पाने के आसान घरेलु नुस्खें




1. सेंधा नमक



सेंधा नमक में मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होने से यह शरीर के पीएच स्तर को नियंत्रित करता है और गर्दन की अकड़ और कड़ेपन को कम करता है।



2. लहसुन



आधे ग्लास पानी में दो चम्मच सेंधा नमक मिला कर पेस्ट बना लें और उसे गर्दन के प्रभावित क्षेत्र में लगाएं, या गुनगुने पानी में दो कप सेंधा नमक डाल कर रोजाना स्नान करें, इन दोनों ही तरीकों से काफी फायदा मिलेगा।



3. लहसुन



सुबह खाली पेट पानी के साथ कच्चा लहसुन नियमित खाएं अथवा तेल में लहसुन को पका कर गर्दन में मालिश करें, इससे दर्द में काफी राहत मिलेगी। दरसल लहसुन में दर्द निवारक गुण होता है और यह सूजन को भी कम करता है।



4. हल्दी



हल्दी असहनीय दर्द को खत्म करने में सबसे कारगर दवाई साबित हुई है। इतना ही नहीं यह मांसपेशियों के खिचांव को भी ठीक करता है।



5. तिल के बीज



तिल के गर्म तेल से गर्दन की हल्की मालिश 5 से 10 मिनट तक करें, फिर वहां गर्म पानी की पट्टी डालें, या आप एक ग्लास गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी डाल कर पीएं, दर्द से निजात मिलेगी और गर्दन की अकड़ भी कम होगी। तिल में कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, विटामिन के और डी काफी मात्रा में पाई जाती है जो हमारे हड्डी और मांसपेशियों के सेहत के लिए काफी जरुरी है। स्पांडलाइसिस के दर्द में भी तिल काफी कारगर है।

 इन बातों का ध्यान रखें:-


  • पौष्टिक भोजन खाएं, विशेषकर ऐसा भोजन जो कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर हो।

  • चाय और कैफीन का सेवन कम करें।

  • पैदल चलने की कोशिश करें। इससे बोन मास बढ़ता है और शारीरिक रूप से एक्टिव रहें।

  • नियमित रूप से व्यायाम और योग करें।

  • हमेशा आरामदायक बिस्तर पर सोएं। इस बात का ध्यान रखें कि बिस्तर न तो बहुत सख्त हो और न ही बहुत नर्म।

  • स्पोंडिलोसिस से पीड़ित लोग गर्दन के नीचे या पैरो के नीचे तकिया रखने की आदत से बचें।

सर्वाइकल माइलोपैथी (Cervical myelopathy)

यह अवस्था गंभीर रूप से सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस होने में पायी जाती है जो की स्पाइनल स्टेनोसिस ( रीड की हड्डी के संकुचित ) के कारण होती है। यह मांसपेशियों में समन्वय की कमी, मांसपेशियों में ऐठन, चलने में दिक्कत या हाथ-पैर और एड़ियों में झुनझुनी के रूप में होता है कुछ गंभीर मामलों में,इंसान अपने मूत्र और मल विसर्जन पर नियंत्रण खो बैठता है।

सर्वाइकल रेडीकुलोपैथी (Cervical radiculopathy) 

हाँथ के नीचे वाले हिस्से में तेज दर्द होना सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का मुख्य लक्षण है। कभी एक हाथ या दोनों हाथ ही सुन्न हो जाते हैं या उनमे बहुत कमजोरी आ जाती है ।

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