Asthma: अस्थमा में राहत के लिए कारगर है ये थैरपी, जानें इसके बारे में - Health Care Tips Hindi

Asthma: अस्थमा में राहत के लिए कारगर है ये थैरपी, जानें इसके बारे में

asthma : बच्चों व बड़ों के अस्थमा में फर्क होता है ?

बच्चों व वयस्कों में अस्थमा एक जैसा ही होता है। दोनों में एलर्जंस (एलर्जी के कारक) के कारण सांस की नली सिकुड़ जाती है और सूजन आ जाती है। ऐसे में बलगम बनने और सांस लेने में दिक्कत होती है।

अस्थमा से जुड़ी गलतफहमी क्या हैं ?
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बच्चे के बड़े होने पर यह समस्या खत्म हो जाएगी। कुछ को लगता है कि एलर्जंस से दूर रहकर इससे बचा जा सकता है। साथ ही इंहेलर को आखिरी इलाज के तौर पर भी देखते हैं।

स्टेरॉयड को लेकर लोगों में क्या भ्रम है ?
लोगों को लगता है कि इंहेलर में पाए जाने वाले स्टेरॉयड से बच्चे का विकास रुक जाएगा जबकि ये सिर्फ भ्रम है। कॉर्टिकोस्टेरॉयड का बच्चे के विकास से कोई संबंध नहीं है। इंहेलर में मौजूद कॉर्टिकोस्टेरॉयड शरीर में प्राकृतिक रूप से भी बनता है जो सूजन को कम करता है। अस्थमा का समय रहते इलाज न हो तो बच्चे का विकासजरूर प्रभावित हो सकता है।

आईसीएस थैरेपी कैसे कारगर है ?
आईसीएस (इंहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉयड) थैरेपी से काफी कम मात्रा में कॉर्टिकोस्टेरॉयड की डोज सीधे सूजी हुई नलियों में जाती है जिससे राहत मिलती है। ओरल मेडिसिन के मुकाबले इसके परिणाम बेहतर होते हैं साथ ही इससे साइड इफैक्ट्स का खतरा भी काफी कम हो जाता है।

क्या लक्षण न दिखने पर दवा बंद कर दें ?
अक्सर लोग अस्थमा के लक्षण नजर न आने पर दवाइयां लेना छोड़ देते हैं। परिणाम स्वरूप यह बीमारी दोगुने प्रभाव के साथ उभरकर सामने आती है। इसलिए दवा छोड़ने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। बच्चों में यह रोग होने पर अभिभावक इसे नजरअंदाज न करें, एक्सपर्ट से मिलें व कारणों और इलाज की जानकारी लें।



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