दस में से एक कैंसर का संबध सीधा भोजन से जुड़ा हुआ होता है। रेड मीट, आहार में नमक की अधिकता और फाइबर की कमी, कैंसर को खतरे को बढ़ाते हैं। लाल मांस के अधिक सेवन से आंत के कैंसर विकसित होने की आशंका अधिक होती है। खाना पकाने की विधि से भी कैंसर का खतरा बढ़ता है। उच्च तापमान पर खाना पकाने से जो रसायन जारी होते हैं, वो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
आयुर्वेद में भी है इलाज
आयुर्वेद में कैंसर की रोकथाम व इलाज संभव है। मरीज की दिनचर्या में सुधार के साथ एसिडिक डाइट जैसे अचार, पुड़ी-परांठे, खटाई, तली-भुनी चीजों से परहेज करना होता है। अपक्व (बिना पका) या उबला आहार देते हैं।
गिलोय के रस में शहद फायदेमंद
सुबह व शाम 100 ग्राम ज्वारे का रस पीने से लाभ होता है। पोषक व सुपाच्य आहार देते हैं। गिलोय के रस में शहद मिलाकर ले। नीम, हरसिंगार के साथ भी दे सकते हैं। टमाटर का सूप लें। यह प्रयोग भी एंटी कैंसर का काम करता है। सुबह ध्यान, अनुलोम-विलोम करें और पैदल टहलें। इसके अलावा भी कई औषधियां हैं जिनका इस्तेमाल होता है।
- डॉ. हरीश भाकुनी, आयुर्वेद विशेषज्ञ, एनआइए, जयपुर
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