संतुलित व पौष्टिक आहार लेने से सेहत दुरुस्त रहती है। पौष्टिक खानपान और नियमित व्यायाम से मासिक चक्र के दर्द को कम किया जा सकता है। माहवारी के दौरान हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। माहवारी के दौरान नियमित आधा घंटा ज्यादा सोएं। कैल्शियम की कमी से माहवारी के दौरान बहुत दर्द होता है। ये हार्मोनल असंतुलन का कारण भी बन सकता है। इसके लिए तिल के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियां, बींस खानपान में शामिल करें। इससे कैल्शियम की पूर्ति होती है। महिलाओं में आयरन की कमी भी पाई जाती है। शरीर पीला पड़ रहा, थकान महसूस हो रही तो आयरन की कमी हो सकती है। चने, दालें, पालक से आयरन की कमी पूरी होती है।
चेहरा पीला पड़ जाना
हीमोग्लोबिन शरीर में खून को लाल रंग देता है। आयरन की कमी होने से चेहरा पीला पडऩे लगता है। चेहरे पर दाग-धब्बे, स्किन, दांत और होठ का रंग बदलने लगता है। अगर आपके चेहरे का रंग बदल रहा है तो आपमें आयरन की कमी होने लगी है।
खुद को थका महसूस तो नहीं करती
शरीर में आयरन की कमी होने पर थकान होने लगती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाता, जिस कारण हम थकान महसूस करने लगते हैं। झुंझलाहट होने लगती है और काम पर फोकस नहीं कर पाते हैं। एनीमिया होने का मतलब ही आयरन की कमी का होना है।
पीरियड नॉर्मल नहीं आना
यदि नॉर्मल से ज्यादा पीरियड हो रहा है तो शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। कई बार एक ही महीने में दो बार पीरियड होने लगते हैं या लगातार पीरियड्स होने लगते हैं। ऐसा भी तभी होता है, जब शरीर में आयरन की कमी हो गई हो।
पोषक तत्व कारगर
मैग्नीशियम माहवारी के दौरान मांसपेशियों को आराम देता है। बींस, टोफू और पीनट्स में मैग्नीशियम पाया जाता है। विटामिन बी6 डिप्रेशन से राहत दिलाता है। लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है। आलू, ओटमील, केले में विटामिन बी6 होता है।
- डॉ. मेघा शर्मा, गाइनोकोलॉजिस्ट, जयपुर
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