स्तनपान करने वाले शिशुओं की तुलना में ठोस आहार लेने वाले शिशुओं में नींद की समस्या कम होती है. शोध में पाया गया है जिन शिशुओं को जल्दी ठोस आहार देना शुरू किया गया, वे ज्यादा देर तक सोते हैं और रात में कम उठते हैं, और उन्हें जीवन के पहले छह महीने के दौरान स्तनपान पर निर्भर रहने वाले शिशुओं की तुलना में नींद की गंभीर समस्या कम होती है. किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर ग्रिडेओन लैक ने कहा, 'आमतौर पर आधिकारिक सलाह यही दी जाती है कि ठोस आहार देने से शिशुओं में रात के समय सोने की संभावना ज्यादा नहीं होती है. लेकिन यह शोध इस तथ्य पर सवाल उठाता नजर आ रहा है कि 6 महीने तक शिशुओं को मां के दूध ही पिलाना अच्छा है'.
प्रोफेसर ग्रिडेओन के अनुसार यह शोध कहता है कि हमारे जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर इस बात की दूबारा जांच करनी चाहिए कि क्या शिशुओं के लिए 6 माह से पहले ठोस आहार देना कितना फायदेमंद है'. इस शोध का प्रकाशन पत्रिका 'जामा पीडियाट्रिक्स' में किया गया है. शोधकर्ताओं ने 1,303 विशेष रूप से स्तनपान वाले तीन महीने के शिशुओं को दो समूहों में बांटकर इनका अध्ययन किया. हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर शिशुओं को छह माह तक केवल स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है.
छह माह के बाद केवल स्तन दूध शिशु को पर्याप्त पोषक तत्व प्रदान नहीं कर पाता, विशेषकर आयरन. इसी कारण शिशुओं के 6 महीने बाद ठोस भोजन देने की जरुरत पड़ने लगती है.लेकिन इस शोध के बाद अब यह जांच का विषय है कि शिशु के आहार में ठोस भोजन शामिल करने से पहले छह माह तक इंतजार करना सही है या नही.
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